[{"data":1,"prerenderedAt":-1},["ShallowReactive",2],{"platform-features":3,"guide-manali":4},true,{"sources":5,"related":9,"reviewedOn":14,"text":15},[6,7,8],"incredible-india","himachal-tourism","imd",[10,11,12,13],"shimla","spiti","dharamshala","leh-ladakh","2026-10-04",{"en":16,"hi":58,"mr":100},{"overview":17,"bestTime":18,"reachAir":19,"reachRail":20,"reachRoad":21,"stay":22,"highlights":23,"food":42,"tips":43,"faqs":48},"Manali sits in the Kullu valley of Himachal Pradesh at about 2,050 metres, ringed by pine forests and snow peaks beside the Beas river. It is one of India's most popular mountain destinations, mixing temples, cafes, adventure sports and snow, and it is the usual starting point for the road to Lahaul, Spiti and Ladakh. Plan three to five days.","March to June is pleasant and green, and September to October is clear with autumn colour. December to February brings snow and cold, which many people travel for. July and August are monsoon months, when heavy rain can cause landslides and road closures in the mountains.","Kullu-Manali Airport (Bhuntar, KUU) is the nearest airport, about 50 km from Manali, with limited flights. Chandigarh is the larger alternative, followed by a long road journey.","Manali has no railway station. The nearest broad-gauge railhead is around Chandigarh or Kalka, and the narrow-gauge Kangra Valley line ends at Joginder Nagar. Most travellers combine a train with a bus or taxi.","Overnight buses run from Delhi and Chandigarh, and the highway through Mandi and Kullu is the main route. Road conditions change with weather, so check the situation before setting out.","Old Manali is popular with backpackers and cafe-goers, while the Mall Road area is busier and more convenient. Quieter options are in Naggar, Vashisht and Solang, which suit those who want views and calm.",[24,27,30,33,36,39],{"name":25,"text":26},"Hadimba Devi Temple","A wooden temple set in a deodar forest, dedicated to Hadimba, a figure from the Mahabharata.",{"name":28,"text":29},"Solang Valley","A meadow valley known for paragliding, ropeway rides and snow activities in winter.",{"name":31,"text":32},"Atal Tunnel and Lahaul","The tunnel to Sissu gives year-round access to Lahaul, with a very different, drier landscape on the other side.",{"name":34,"text":35},"Rohtang Pass","A high mountain pass open for part of the year; private vehicles need an advance permit and numbers are capped, so check the current rules.",{"name":37,"text":38},"Old Manali and Vashisht","Village lanes with cafes, small shops and natural hot springs in Vashisht.",{"name":40,"text":41},"Naggar","A quiet village about 20 km away with a medieval castle and the Roerich art gallery.","Try trout fish from local streams, siddu and Himachali dham, and Tibetan food such as momos and thukpa. Old Manali has many cafes with international menus.",[44,45,46,47],"Check road status and weather before heading to Lahaul or Rohtang, because closures are common.","Book a Rohtang permit in advance if you plan to drive there; some operators offer taxis that handle it.","Use registered operators for rafting, paragliding and skiing, and check safety equipment.","Carry warm clothes in every season, and take it slow on your first day if you are not used to altitude.",[49,52,55],{"q":50,"a":51},"How many days are enough for Manali?","Three days cover the town, Solang Valley and nearby villages. Add days for Lahaul, Naggar or longer trips onward to Spiti or Ladakh.",{"q":53,"a":54},"When does it snow in Manali?","Snow usually falls between December and February in the town, and higher places such as Solang and Rohtang see snow for longer. Snowfall varies from year to year.",{"q":56,"a":57},"Do I need a permit for Rohtang Pass?","Private vehicles need a permit issued through the Himachal Pradesh administration, and a daily limit applies. Rules change, so check the official portal for the current process.",{"overview":59,"bestTime":60,"reachAir":61,"reachRail":62,"reachRoad":63,"stay":64,"highlights":65,"food":84,"tips":85,"faqs":90},"मनाली हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में लगभग 2,050 मीटर की ऊँचाई पर ब्यास नदी के किनारे, चीड़ के जंगलों और बर्फ़ीली चोटियों से घिरा हुआ है। यह भारत के सबसे लोकप्रिय पहाड़ी स्थलों में से एक है, जहाँ मंदिर, कैफ़े, साहसिक खेल और बर्फ़ सब मिलते हैं, और यही लाहौल, स्पीति और लद्दाख की सड़क का आम पड़ाव है। तीन से पाँच दिन रखें।","मार्च से जून मौसम सुहावना और हरा-भरा रहता है, और सितंबर से अक्टूबर साफ़ आसमान और पतझड़ के रंगों के साथ अच्छा समय है। दिसंबर से फ़रवरी में बर्फ़ और ठंड रहती है, जिसके लिए बहुत लोग आते हैं। जुलाई और अगस्त मानसून के महीने हैं, जब भारी बारिश से पहाड़ों में भूस्खलन और सड़कें बंद हो सकती हैं।","कुल्लू-मनाली हवाई अड्डा (भुंतर, KUU) सबसे नज़दीकी है, जो मनाली से लगभग 50 किमी दूर है और यहाँ सीमित उड़ानें हैं। चंडीगढ़ बड़ा विकल्प है, जिसके बाद लंबा सड़क सफ़र होता है।","मनाली में रेलवे स्टेशन नहीं है। सबसे नज़दीकी ब्रॉड-गेज स्टेशन चंडीगढ़ या कालका के आसपास है, और नैरो-गेज कांगड़ा घाटी लाइन जोगिंदर नगर पर ख़त्म होती है। ज़्यादातर यात्री ट्रेन के साथ बस या टैक्सी जोड़ते हैं।","दिल्ली और चंडीगढ़ से रात की बसें चलती हैं, और मंडी व कुल्लू होकर जाने वाला राजमार्ग मुख्य रास्ता है। मौसम के साथ सड़क की हालत बदलती है, इसलिए निकलने से पहले स्थिति जाँच लें।","ओल्ड मनाली बैकपैकर और कैफ़े पसंद करने वालों में लोकप्रिय है, जबकि माल रोड इलाक़ा ज़्यादा व्यस्त और सुविधाजनक है। नग्गर, वशिष्ठ और सोलंग ज़्यादा शांत विकल्प हैं, जो नज़ारे और सुकून चाहने वालों के लिए ठीक हैं।",[66,69,72,75,78,81],{"name":67,"text":68},"हडिंबा देवी मंदिर","देवदार के जंगल में बना लकड़ी का मंदिर, जो महाभारत की पात्र हिडिंबा को समर्पित है।",{"name":70,"text":71},"सोलंग घाटी","घास के मैदानों वाली घाटी जो पैराग्लाइडिंग, रोपवे और सर्दियों में बर्फ़ की गतिविधियों के लिए जानी जाती है।",{"name":73,"text":74},"अटल टनल और लाहौल","सिस्सू तक जाने वाली सुरंग लाहौल तक साल भर पहुँच देती है, जिसके दूसरी ओर बहुत अलग और सूखा भू-दृश्य है।",{"name":76,"text":77},"रोहतांग दर्रा","ऊँचा पहाड़ी दर्रा जो साल के कुछ हिस्से में खुला रहता है; निजी वाहनों को पहले से अनुमति लेनी होती है और संख्या सीमित है, इसलिए मौजूदा नियम देख लें।",{"name":79,"text":80},"ओल्ड मनाली और वशिष्ठ","कैफ़े, छोटी दुकानों वाली गाँव की गलियाँ और वशिष्ठ में प्राकृतिक गर्म पानी के सोते।",{"name":82,"text":83},"नग्गर","लगभग 20 किमी दूर शांत गाँव, जहाँ मध्यकालीन क़िला और रोरिक आर्ट गैलरी है।","स्थानीय धाराओं की ट्राउट मछली, सिड्डू और हिमाचली धाम, तथा मोमो और थुकपा जैसे तिब्बती व्यंजन आज़माएँ। ओल्ड मनाली में अंतरराष्ट्रीय मेन्यू वाले कई कैफ़े हैं।",[86,87,88,89],"लाहौल या रोहतांग जाने से पहले सड़क की स्थिति और मौसम देख लें, क्योंकि बंदी आम है।","अगर रोहतांग तक ख़ुद गाड़ी चलानी है तो अनुमति पहले से लें; कुछ टैक्सी चालक यह काम सँभाल लेते हैं।","राफ़्टिंग, पैराग्लाइडिंग और स्कीइंग के लिए पंजीकृत संचालकों को चुनें और सुरक्षा उपकरण जाँच लें।","हर मौसम में गर्म कपड़े साथ रखें, और अगर ऊँचाई की आदत नहीं है तो पहले दिन आराम से चलें।",[91,94,97],{"q":92,"a":93},"मनाली के लिए कितने दिन काफ़ी हैं?","तीन दिन में शहर, सोलंग घाटी और आसपास के गाँव देखे जा सकते हैं। लाहौल, नग्गर या आगे स्पीति और लद्दाख की लंबी यात्राओं के लिए और दिन जोड़ें।",{"q":95,"a":96},"मनाली में बर्फ़ कब पड़ती है?","शहर में आमतौर पर दिसंबर से फ़रवरी के बीच बर्फ़ गिरती है, और सोलंग तथा रोहतांग जैसी ऊँची जगहों पर बर्फ़ ज़्यादा समय तक रहती है। हर साल बर्फ़बारी अलग होती है।",{"q":98,"a":99},"क्या रोहतांग दर्रे के लिए अनुमति चाहिए?","निजी वाहनों के लिए हिमाचल प्रदेश प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है, और रोज़ाना की सीमा लागू होती है। नियम बदलते रहते हैं, इसलिए मौजूदा प्रक्रिया के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें।",{"overview":101,"bestTime":102,"reachAir":103,"reachRail":104,"reachRoad":105,"stay":106,"highlights":107,"food":125,"tips":126,"faqs":131},"मनाली हिमाचल प्रदेशातील कुल्लू खोऱ्यात सुमारे २,०५० मीटर उंचीवर बियास नदीकाठी, पाईनच्या जंगलांनी आणि बर्फाच्छादित शिखरांनी वेढलेले आहे. हे भारतातील सर्वात लोकप्रिय डोंगरी स्थळांपैकी एक आहे, जिथे मंदिरे, कॅफे, साहसी खेळ आणि बर्फ सगळे मिळते, आणि लाहौल, स्पिती व लडाखकडे जाणाऱ्या रस्त्याचे हे नेहमीचे सुरुवातीचे ठिकाण आहे. तीन ते पाच दिवस ठेवा.","मार्च ते जून हवामान सुखद आणि हिरवेगार असते, आणि सप्टेंबर ते ऑक्टोबर स्वच्छ आकाश आणि शरद ऋतूच्या रंगांसह चांगला काळ आहे. डिसेंबर ते फेब्रुवारी बर्फ आणि थंडी असते, ज्यासाठी अनेक लोक येतात. जुलै आणि ऑगस्ट हे पावसाळी महिने आहेत, जेव्हा मुसळधार पावसामुळे डोंगरात दरडी कोसळू शकतात आणि रस्ते बंद होऊ शकतात.","कुल्लू-मनाली विमानतळ (भुंतर, KUU) सर्वात जवळचे असून मनालीपासून सुमारे ५० किमी अंतरावर आहे आणि येथे मर्यादित विमाने आहेत. चंदीगड हा मोठा पर्याय आहे, त्यानंतर लांब रस्ता प्रवास करावा लागतो.","मनालीत रेल्वे स्थानक नाही. सर्वात जवळचे ब्रॉड-गेज स्थानक चंदीगड किंवा कालक्याच्या आसपास आहे, आणि नॅरो-गेज कांगडा व्हॅली मार्ग जोगिंदर नगर येथे संपतो. बहुतेक प्रवासी रेल्वेसोबत बस किंवा टॅक्सी जोडतात.","दिल्ली आणि चंदीगडहून रात्रीच्या बस धावतात, आणि मंडी व कुल्लूमार्गे जाणारा महामार्ग हा मुख्य मार्ग आहे. हवामानानुसार रस्त्यांची स्थिती बदलते, त्यामुळे निघण्यापूर्वी परिस्थिती तपासा.","ओल्ड मनाली बॅकपॅकर आणि कॅफे आवडणाऱ्यांमध्ये लोकप्रिय आहे, तर माल रोड परिसर अधिक गजबजलेला आणि सोयीचा आहे. नग्गर, वशिष्ठ आणि सोलंग हे अधिक शांत पर्याय आहेत, जे दृश्ये आणि शांतता हवी असणाऱ्यांसाठी योग्य आहेत.",[108,111,114,117,120,123],{"name":109,"text":110},"हिडिंबा देवी मंदिर","देवदारच्या जंगलातील लाकडी मंदिर, जे महाभारतातील पात्र हिडिंबा हिला समर्पित आहे.",{"name":112,"text":113},"सोलंग खोरे","गवताळ कुरणांचे खोरे जे पॅराग्लायडिंग, रोपवे आणि हिवाळ्यातील बर्फाच्या खेळांसाठी ओळखले जाते.",{"name":115,"text":116},"अटल बोगदा आणि लाहौल","सिस्सूपर्यंत जाणारा बोगदा लाहौलपर्यंत वर्षभर पोहोचण्याची सोय देतो, ज्याच्या पलीकडे खूप वेगळा आणि कोरडा भूप्रदेश आहे.",{"name":118,"text":119},"रोहतांग खिंड","वर्षाच्या काही काळ खुली असणारी उंच डोंगरी खिंड; खासगी वाहनांना आधीच परवानगी घ्यावी लागते आणि संख्या मर्यादित आहे, त्यामुळे सध्याचे नियम तपासा.",{"name":121,"text":122},"ओल्ड मनाली आणि वशिष्ठ","कॅफे, लहान दुकाने असलेल्या गावातील गल्ल्या आणि वशिष्ठमधील नैसर्गिक गरम पाण्याचे झरे.",{"name":82,"text":124},"सुमारे २० किमी अंतरावरील शांत गाव, जिथे मध्ययुगीन किल्ला आणि रोरिक कला दालन आहे.","स्थानिक ओढ्यांतील ट्राउट मासा, सिड्डू आणि हिमाचली धाम, तसेच मोमो आणि थुकपासारखे तिबेटी पदार्थ चाखून पाहा. ओल्ड मनालीत आंतरराष्ट्रीय मेनू असलेले अनेक कॅफे आहेत.",[127,128,129,130],"लाहौल किंवा रोहतांगला जाण्यापूर्वी रस्त्याची स्थिती आणि हवामान तपासा, कारण रस्ते बंद होणे सामान्य आहे.","रोहतांगपर्यंत स्वतः गाडी चालवायची असेल तर परवानगी आधीच घ्या; काही टॅक्सी चालक हे काम सांभाळतात.","राफ्टिंग, पॅराग्लायडिंग आणि स्कीइंगसाठी नोंदणीकृत संचालक निवडा आणि सुरक्षा उपकरणे तपासा.","प्रत्येक ऋतूत उबदार कपडे सोबत ठेवा, आणि उंचीची सवय नसेल तर पहिल्या दिवशी निवांतपणे फिरा.",[132,135,138],{"q":133,"a":134},"मनालीसाठी किती दिवस पुरेसे आहेत?","तीन दिवसांत शहर, सोलंग खोरे आणि आजूबाजूची गावे पाहून होतात. लाहौल, नग्गर किंवा पुढे स्पिती आणि लडाखच्या लांब प्रवासासाठी आणखी दिवस जोडा.",{"q":136,"a":137},"मनालीत बर्फ कधी पडतो?","शहरात साधारणपणे डिसेंबर ते फेब्रुवारी दरम्यान बर्फ पडतो, आणि सोलंग व रोहतांगसारख्या उंच ठिकाणी बर्फ जास्त काळ टिकतो. दरवर्षी बर्फवृष्टी वेगळी असते.",{"q":139,"a":140},"रोहतांग खिंडीसाठी परवानगी लागते का?","खासगी वाहनांसाठी हिमाचल प्रदेश प्रशासनाकडून परवानगी घ्यावी लागते आणि दररोजची मर्यादा लागू असते. नियम बदलत राहतात, त्यामुळे सध्याच्या प्रक्रियेसाठी अधिकृत पोर्टल तपासा."]