[{"data":1,"prerenderedAt":-1},["ShallowReactive",2],{"platform-features":3,"guide-ajanta-ellora":4},true,{"sources":5,"related":10,"reviewedOn":15,"text":16},[6,7,8,9],"incredible-india","maharashtra-tourism","asi","unesco",[11,12,13,14],"mumbai","hampi","hyderabad","khajuraho","2026-10-04",{"en":17,"hi":59,"mr":101},{"overview":18,"bestTime":19,"reachAir":20,"reachRail":21,"reachRoad":22,"stay":23,"highlights":24,"food":43,"tips":44,"faqs":49},"Ajanta and Ellora are two UNESCO World Heritage cave complexes in Maharashtra, usually visited from the city of Chhatrapati Sambhajinagar, formerly known as Aurangabad. Ajanta is known for Buddhist cave monasteries with ancient paintings and sculpture, while Ellora has Buddhist, Hindu and Jain caves carved side by side, including the great Kailasa temple. Plan two to three days to see both caves and the city sights without rushing.","October to March is the most comfortable season, with cooler weather for walking between caves. Summers are hot, so go early in the day. In the monsoon the surrounding hills are green and waterfalls may flow, but paths can be slippery and access may be affected, so check current conditions. Weekly closure days apply at these monuments, traditionally Monday for Ajanta and Tuesday for Ellora, so check the current closure day with the Archaeological Survey of India before you plan.","Chhatrapati Sambhajinagar (Aurangabad) has its own airport with flights from major cities. Mumbai and Pune are other options, followed by a rail or road journey.","Chhatrapati Sambhajinagar railway station, still often listed as Aurangabad, is the main railhead, with connections from Mumbai, Pune, Hyderabad and other cities. From there taxis, buses and tours reach both cave sites.","Ellora is roughly 30 km from the city, and Ajanta is farther, a little over 100 km. Both are reached by road, and taxis or organised day tours are common. Allow a full day for each site.","Most visitors stay in Chhatrapati Sambhajinagar, which has a wide range of hotels and is a convenient base for both sites and the city sights. Basic stays and a few lodges are available closer to the caves, but options are limited, so book ahead in peak season.",[25,28,31,34,37,40],{"name":26,"text":27},"Ajanta Caves","A series of rock-cut Buddhist monasteries and prayer halls in a horseshoe-shaped gorge, famous for ancient wall paintings and carved sculpture.",{"name":29,"text":30},"Ellora Kailasa Temple (Cave 16)","A huge temple dedicated to Shiva, carved out of a single rock from the top down, and one of the most remarkable feats of rock-cut architecture.",{"name":32,"text":33},"Ellora Buddhist, Hindu and Jain caves","Dozens of caves from different faiths in one cliff face, showing the religious diversity of the region over many centuries.",{"name":35,"text":36},"Daulatabad Fort","A large hill fort between the city and Ellora, with massive walls, a moat and a dark tunnel passage inside, and wide views from the top.",{"name":38,"text":39},"Bibi ka Maqbara","A Mughal-era tomb in the city, often compared to the Taj Mahal in design, set in a walled garden.",{"name":41,"text":42},"Aurangabad Caves","A smaller group of Buddhist caves on a hillside near the city, good for visitors short on time.","The region has a distinct style of Marathwada and Mughlai-influenced food. Try naan with local curries, mutton or vegetarian dishes, jowar bhakri, pithla and thecha. Pick clean, busy eateries and drink only bottled or purified water.",[45,46,47,48],"Check the weekly closure day of each monument with the Archaeological Survey of India before fixing your plan, as it can be different for each site.","Do not touch the paintings or carvings, and follow the rules on lighting and flash photography to protect the artwork.","Wear comfortable shoes, and carry water and sun protection, as there are steps, uneven paths and not much shade.","Dress modestly at places of worship, hire official guides, and avoid litter at the sites.",[50,53,56],{"q":51,"a":52},"How many days are needed for Ajanta and Ellora?","Two days are ideal, one for each cave complex, with a third day for Daulatabad Fort and the city sights if you wish.",{"q":54,"a":55},"Are Ajanta and Ellora open every day?","No. There is a weekly closure day at each monument, traditionally Monday for Ajanta and Tuesday for Ellora. Check the current day with the Archaeological Survey of India before you travel, as schedules can change.",{"q":57,"a":58},"Is the city called Aurangabad or Chhatrapati Sambhajinagar?","The city has been officially renamed Chhatrapati Sambhajinagar. Many maps, signs, timetables and older bookings may still show Aurangabad, so look for both names.",{"overview":60,"bestTime":61,"reachAir":62,"reachRail":63,"reachRoad":64,"stay":65,"highlights":66,"food":85,"tips":86,"faqs":91},"अजंता और एलोरा महाराष्ट्र के दो यूनेस्को विश्व धरोहर गुफा समूह हैं, जिन्हें आमतौर पर छत्रपति संभाजीनगर शहर से देखा जाता है, जो पहले औरंगाबाद कहलाता था। अजंता बौद्ध गुफा विहारों, प्राचीन चित्रों और मूर्तिकला के लिए जाना जाता है, जबकि एलोरा में बौद्ध, हिंदू और जैन गुफाएँ साथ-साथ तराशी गई हैं, जिनमें भव्य कैलास मंदिर भी शामिल है। दोनों गुफाओं और शहर के स्थलों को बिना जल्दबाज़ी के देखने के लिए दो से तीन दिन रखें।","अक्टूबर से मार्च सबसे आरामदायक मौसम है, जब गुफाओं के बीच चलने के लिए ठंडा मौसम रहता है। गर्मियाँ तेज़ होती हैं, इसलिए दिन में जल्दी जाएँ। मानसून में आसपास की पहाड़ियाँ हरी होती हैं और झरने बह सकते हैं, पर रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं और पहुँच प्रभावित हो सकती है, इसलिए मौजूदा हालात जाँच लें। इन स्मारकों पर साप्ताहिक बंदी का दिन होता है, परंपरागत रूप से अजंता के लिए सोमवार और एलोरा के लिए मंगलवार, इसलिए योजना बनाने से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से मौजूदा बंदी का दिन पता कर लें।","छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) का अपना हवाई अड्डा है जहाँ प्रमुख शहरों से उड़ानें आती हैं। मुंबई और पुणे अन्य विकल्प हैं, इसके बाद रेल या सड़क से यात्रा करनी होती है।","छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन, जो अब भी अक्सर औरंगाबाद के नाम से दर्ज मिलता है, मुख्य स्टेशन है, जहाँ मुंबई, पुणे, हैदराबाद और अन्य शहरों से गाड़ियाँ जुड़ती हैं। वहाँ से टैक्सी, बस और टूर दोनों गुफा स्थलों तक जाते हैं।","एलोरा शहर से लगभग 30 किमी दूर है, और अजंता और आगे, 100 किमी से कुछ अधिक। दोनों सड़क से पहुँचे जा सकते हैं, और टैक्सी या संगठित दिन के टूर आम हैं। हर स्थल के लिए पूरा दिन रखें।","ज़्यादातर पर्यटक छत्रपति संभाजीनगर में ठहरते हैं, जहाँ होटलों की बड़ी रेंज है और जो दोनों स्थलों तथा शहर के आकर्षणों के लिए सुविधाजनक ठिकाना है। गुफाओं के नज़दीक साधारण ठिकाने और कुछ लॉज मिलते हैं, पर विकल्प सीमित हैं, इसलिए पर्यटन के चरम मौसम में पहले से बुक करें।",[67,70,73,76,79,82],{"name":68,"text":69},"अजंता गुफाएँ","घोड़े की नाल के आकार की घाटी में चट्टान काटकर बने बौद्ध विहारों और प्रार्थना कक्षों की शृंखला, जो प्राचीन भित्ति चित्रों और तराशी हुई मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।",{"name":71,"text":72},"एलोरा का कैलास मंदिर (गुफा 16)","शिव को समर्पित विशाल मंदिर, जो एक ही चट्टान को ऊपर से नीचे की ओर तराशकर बनाया गया है, और चट्टान काटकर बनी वास्तुकला की सबसे अद्भुत उपलब्धियों में से एक है।",{"name":74,"text":75},"एलोरा की बौद्ध, हिंदू और जैन गुफाएँ","एक ही चट्टानी दीवार में अलग-अलग धर्मों की दर्जनों गुफाएँ, जो कई सदियों में इस क्षेत्र की धार्मिक विविधता दिखाती हैं।",{"name":77,"text":78},"दौलताबाद किला","शहर और एलोरा के बीच विशाल पहाड़ी किला, जिसमें मज़बूत दीवारें, खाई और भीतर अँधेरी सुरंग का रास्ता है, और ऊपर से दूर तक नज़ारा दिखता है।",{"name":80,"text":81},"बीबी का मकबरा","शहर में मुग़ल काल का मकबरा, जिसे बनावट में अक्सर ताजमहल से मिलाया जाता है, और जो चारदीवारी वाले बाग़ में बना है।",{"name":83,"text":84},"औरंगाबाद गुफाएँ","शहर के पास पहाड़ी पर बौद्ध गुफाओं का छोटा समूह, जो कम समय वाले पर्यटकों के लिए अच्छा है।","इस क्षेत्र का मराठवाड़ा और मुग़लई प्रभाव वाला अपना अलग खान-पान है। स्थानीय सब्ज़ियों और करी के साथ नान, मटन या शाकाहारी व्यंजन, ज्वार की भाकरी, पिठला और ठेचा आज़माएँ। साफ़ और भीड़ वाले भोजनालय चुनें और केवल बोतलबंद या शुद्ध किया हुआ पानी पिएँ।",[87,88,89,90],"योजना पक्की करने से पहले हर स्मारक की साप्ताहिक बंदी का दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जाँच लें, क्योंकि यह हर स्थल का अलग हो सकता है।","चित्रों या नक्काशी को न छुएँ, और कलाकृति की सुरक्षा के लिए रोशनी और फ़्लैश फ़ोटोग्राफ़ी के नियमों का पालन करें।","आरामदायक जूते पहनें, और पानी तथा धूप से बचाव साथ रखें, क्योंकि सीढ़ियाँ, ऊबड़-खाबड़ रास्ते हैं और छाया कम है।","पूजा स्थलों पर शालीन कपड़े पहनें, अधिकृत गाइड लें, और स्थलों पर कचरा न फैलाएँ।",[92,95,98],{"q":93,"a":94},"अजंता और एलोरा के लिए कितने दिन चाहिए?","दो दिन आदर्श हैं, हर गुफा समूह के लिए एक, और चाहें तो तीसरा दिन दौलताबाद किले और शहर के स्थलों के लिए।",{"q":96,"a":97},"क्या अजंता और एलोरा रोज़ खुले रहते हैं?","नहीं। हर स्मारक पर साप्ताहिक बंदी का दिन होता है, परंपरागत रूप से अजंता के लिए सोमवार और एलोरा के लिए मंगलवार। यात्रा से पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से मौजूदा दिन जाँच लें, क्योंकि समय-सारणी बदल सकती है।",{"q":99,"a":100},"शहर का नाम औरंगाबाद है या छत्रपति संभाजीनगर?","शहर का आधिकारिक नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर किया गया है। कई नक्शों, संकेतों, समय-सारणियों और पुरानी बुकिंग में अब भी औरंगाबाद दिख सकता है, इसलिए दोनों नाम देखें।",{"overview":102,"bestTime":103,"reachAir":104,"reachRail":105,"reachRoad":106,"stay":107,"highlights":108,"food":126,"tips":127,"faqs":132},"अजिंठा आणि वेरूळ हे महाराष्ट्रातील दोन युनेस्को जागतिक वारसा लेणी समूह आहेत, जे सहसा छत्रपती संभाजीनगर शहरातून पाहिले जातात, ज्याला पूर्वी औरंगाबाद म्हणत. अजिंठा बौद्ध लेणी विहारांसाठी, प्राचीन चित्रांसाठी आणि शिल्पकलेसाठी ओळखले जाते, तर वेरूळमध्ये बौद्ध, हिंदू आणि जैन लेणी शेजारी शेजारी कोरलेली आहेत, ज्यात भव्य कैलास मंदिराचाही समावेश आहे. दोन्ही लेणी आणि शहरातील स्थळे घाई न करता पाहण्यासाठी दोन ते तीन दिवस ठेवा.","ऑक्टोबर ते मार्च हा सर्वात आल्हाददायक हंगाम आहे, जेव्हा लेण्यांमध्ये फिरण्यासाठी थंड हवामान असते. उन्हाळा तापदायक असतो, त्यामुळे दिवसाच्या सुरुवातीलाच जा. पावसाळ्यात आजूबाजूच्या टेकड्या हिरव्यागार असतात आणि धबधबे वाहत असू शकतात, पण वाटा निसरड्या असू शकतात आणि प्रवेशावर परिणाम होऊ शकतो, त्यामुळे सध्याची परिस्थिती तपासा. या स्मारकांवर आठवड्यातील एक दिवस बंद असतो, पारंपरिकरीत्या अजिंठ्यासाठी सोमवार आणि वेरूळसाठी मंगळवार, त्यामुळे नियोजन करण्यापूर्वी भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षणाकडून सध्याचा बंदचा दिवस तपासा.","छत्रपती संभाजीनगर (औरंगाबाद) येथे स्वतःचे विमानतळ आहे जिथे प्रमुख शहरांतून विमाने येतात. मुंबई आणि पुणे हे इतर पर्याय आहेत, त्यानंतर रेल्वे किंवा रस्त्याने प्रवास करावा लागतो.","छत्रपती संभाजीनगर रेल्वे स्थानक, जे अजूनही अनेकदा औरंगाबाद नावाने नोंदवलेले दिसते, हे मुख्य स्थानक आहे, जिथे मुंबई, पुणे, हैदराबाद आणि इतर शहरांतून गाड्या जोडलेल्या आहेत. तिथून टॅक्सी, बस आणि टूर दोन्ही लेणी स्थळांपर्यंत जातात.","वेरूळ शहरापासून सुमारे ३० किमी अंतरावर आहे, आणि अजिंठा त्याहून दूर, १०० किमीपेक्षा थोडे जास्त. दोन्ही रस्त्याने पोहोचता येतात, आणि टॅक्सी किंवा आयोजित दिवसाचे टूर सामान्य आहेत. प्रत्येक स्थळासाठी पूर्ण दिवस ठेवा.","बहुतेक पर्यटक छत्रपती संभाजीनगरमध्ये राहतात, जिथे हॉटेलांची मोठी श्रेणी आहे आणि जे दोन्ही स्थळांसाठी तसेच शहरातील आकर्षणांसाठी सोयीचे ठिकाण आहे. लेण्यांच्या जवळ साधे निवास आणि काही लॉज उपलब्ध आहेत, पण पर्याय मर्यादित आहेत, त्यामुळे गर्दीच्या हंगामात आधी आरक्षण करा.",[109,112,115,118,121,123],{"name":110,"text":111},"अजिंठा लेणी","घोड्याच्या नालेच्या आकाराच्या दरीत खडक कोरून बनवलेल्या बौद्ध विहारांची आणि प्रार्थनागृहांची मालिका, जी प्राचीन भित्तिचित्रांसाठी आणि कोरीव शिल्पांसाठी प्रसिद्ध आहे.",{"name":113,"text":114},"वेरूळचे कैलास मंदिर (लेणे १६)","शिवाला समर्पित विशाल मंदिर, जे एकाच खडकातून वरून खालच्या दिशेने कोरले आहे, आणि खडकात कोरलेल्या स्थापत्यकलेतील सर्वात विलक्षण कामगिरींपैकी एक आहे.",{"name":116,"text":117},"वेरूळची बौद्ध, हिंदू आणि जैन लेणी","एकाच कड्यात वेगवेगळ्या धर्मांची डझनभर लेणी, जी अनेक शतकांतील या प्रदेशाची धार्मिक विविधता दाखवतात.",{"name":119,"text":120},"दौलताबाद किल्ला","शहर आणि वेरूळ यांच्या दरम्यानचा मोठा डोंगरी किल्ला, ज्यात भक्कम तटबंदी, खंदक आणि आत अंधारा बोगद्याचा मार्ग आहे, आणि वरून दूरवरचे दृश्य दिसते.",{"name":80,"text":122},"शहरातील मुघल काळातील कबर, जिची रचना अनेकदा ताजमहालाशी तुलना केली जाते, आणि जी तटबंदीच्या बागेत आहे.",{"name":124,"text":125},"औरंगाबाद लेणी","शहराजवळच्या डोंगरउतारावरील बौद्ध लेण्यांचा लहान समूह, जो कमी वेळ असलेल्या पर्यटकांसाठी चांगला आहे.","या प्रदेशाची मराठवाडी आणि मुघलाई प्रभावाची स्वतःची वेगळी खाद्यशैली आहे. स्थानिक रस्से आणि भाज्यांसोबत नान, मटण किंवा शाकाहारी पदार्थ, ज्वारीची भाकरी, पिठले आणि ठेचा चाखून पाहा. स्वच्छ आणि गर्दीची उपाहारगृहे निवडा आणि फक्त बाटलीबंद किंवा शुद्ध केलेले पाणी प्या.",[128,129,130,131],"योजना ठरवण्यापूर्वी प्रत्येक स्मारकाचा साप्ताहिक बंदचा दिवस भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षणाकडून तपासा, कारण तो प्रत्येक स्थळासाठी वेगळा असू शकतो.","चित्रांना किंवा कोरीव कामाला हात लावू नका, आणि कलाकृतीच्या संरक्षणासाठी प्रकाशयोजना आणि फ्लॅश फोटोग्राफीचे नियम पाळा.","आरामदायक बूट घाला, आणि पाणी व उन्हापासून संरक्षणाचे साहित्य सोबत ठेवा, कारण पायऱ्या, खडबडीत वाटा आहेत आणि सावली कमी आहे.","प्रार्थनास्थळी साधे कपडे घाला, अधिकृत मार्गदर्शक घ्या, आणि स्थळांवर कचरा टाकू नका.",[133,136,139],{"q":134,"a":135},"अजिंठा आणि वेरूळसाठी किती दिवस लागतात?","दोन दिवस आदर्श आहेत, प्रत्येक लेणी समूहासाठी एक, आणि हवे असल्यास तिसरा दिवस दौलताबाद किल्ला आणि शहरातील स्थळांसाठी.",{"q":137,"a":138},"अजिंठा आणि वेरूळ रोज उघडे असतात का?","नाही. प्रत्येक स्मारकावर साप्ताहिक बंदचा दिवस असतो, पारंपरिकरीत्या अजिंठ्यासाठी सोमवार आणि वेरूळसाठी मंगळवार. प्रवासापूर्वी भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षणाकडून सध्याचा दिवस तपासा, कारण वेळापत्रके बदलू शकतात.",{"q":140,"a":141},"शहराचे नाव औरंगाबाद आहे की छत्रपती संभाजीनगर?","शहराचे अधिकृत नाव बदलून छत्रपती संभाजीनगर करण्यात आले आहे. अनेक नकाशे, फलक, वेळापत्रके आणि जुन्या आरक्षणांवर अजूनही औरंगाबाद दिसू शकते, त्यामुळे दोन्ही नावे पाहा."]